प्रणव बजाज
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को चारों दिशाओं से बेहतर सड़क संपर्क देने के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं। इन्हीं में उज्जैन-गरोठ हाईवे भी शामिल है। लेकिन निर्माणाधीन मार्ग पर पुल की करीब 40 से 45 फीट ऊंची दीवार लगभग 50 मीटर लंबाई में धंसने की खबर ने परियोजना की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि निर्माण के दौरान पहले भी इस मार्ग के एक हिस्से में धंसाव की घटना सामने आने की बात कही जा रही है। यदि एक ही परियोजना में बार-बार संरचनात्मक समस्या सामने आती है तो सवाल केवल ठेकेदार का नहीं, बल्कि डिजाइन, मिट्टी परीक्षण, नींव, सामग्री और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी व्यवस्था का है।
ठेकेदार कौन, मालिक कौन?
परियोजना अलग-अलग पैकेज में बांटी गई है। उपलब्ध परियोजना दस्तावेजों में पैकेज-III के लिए एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का नाम सामने आता है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसके प्रमुख प्रवर्तकों में अरुणकुमार मणजीभाई बंभानिया, जो कंपनी के प्रबंध निदेशक भी हैं, शामिल हैं।
इसी तरह परियोजना से जुड़े पैकेजों में रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड का नाम भी सामने आता है। कंपनी के आधिकारिक अभिलेख के अनुसार नारायण सिंह राव अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक और प्रवर्तक हैं। दिलीप सिंह राव तथा रवि सिंह राव भी कंपनी के प्रवर्तक निदेशक हैं।
रवि इंफ्राबिल्ड की अपनी वेबसाइट भी उज्जैन-गरोठ परियोजना से जुड़े काम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मिले प्रशंसा-पत्र का उल्लेख करती है।
मोहन यादव सरकार के सामने असली परीक्षा
मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह क्षेत्र उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क परियोजनाओं पर भारी सरकारी निवेश हो रहा है। ऐसे में निर्माणाधीन पुल की दीवार का दोबारा धंसना विपक्ष के लिए ही नहीं, सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए भी गंभीर सवाल है।
क्या पहली घटना के बाद निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच हुई थी?
क्या मिट्टी और नींव की दोबारा जांच कराई गई?
दीवार किस पैकेज और किस ठेकेदार के हिस्से में धंसी?
गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी किस अभियंता की थी?
और यदि निर्माण में खामी मिली तो ठेकेदार पर क्या कार्रवाई हुई?
सबसे बड़ा सवाल—सिंहस्थ से पहले सड़क जल्दी पूरी करना लक्ष्य है या मजबूत और सुरक्षित सड़क बनाना?
सरकार को सिर्फ क्षतिग्रस्त दीवार दोबारा खड़ी करने के बजाय पूरे प्रभावित हिस्से का स्वतंत्र संरचनात्मक परीक्षण कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। क्योंकि हजारों करोड़ की सड़क पर आज दीवार धंसी है; कल यही लापरवाही यातायात शुरू होने के बाद बड़ी दुर्घटना में बदल गई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

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