समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर केंद्र की राजनीति अब राज्यवार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा।
फिलहाल उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य है जहां UCC जनवरी 2025 से लागू है। इसके अलावा गुजरात, असम और मध्यप्रदेश की विधानसभाएं UCC से जुड़े कानून पारित कर चुकी हैं। हालांकि इन तीनों राज्यों में कानून के प्रभावी होने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी मसौदा तैयार करने की दिशा में समितियां बनाई गई हैं।
राज्यवार रास्ता अपनाने के पीछे संवैधानिक आधार भी है। विवाह, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे विषय संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं, इसलिए संसद के साथ राज्य विधानसभाओं को भी कानून बनाने की शक्ति है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परंपराओं और परिस्थितियों को देखते हुए अलग मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।
लेकिन 21 राज्यों तक पहुंचने की राह में NDA के भीतर मतभेद सामने आ गए हैं। JDU ने राष्ट्रीय स्तर पर UCC के सिद्धांत का विरोध न करते हुए बिहार में इसे लागू करने पर असहमति जताई है। TDP समेत कुछ सहयोगी दलों ने व्यापक चर्चा और सहमति की जरूरत बताई है।
यानी 2029 की समयसीमा घोषित हो चुकी है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने के लिए विधानसभा प्रक्रिया, राष्ट्रपति की मंजूरी जहां आवश्यक हो, नियमों की अधिसूचना और गठबंधन सहयोगियों की राजनीतिक सहमति—इन सभी चरणों से गुजरना होगा।

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