पंजाब की राजनीति में 2027 का विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता के पांच साल के कामकाज का हिसाब नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि 2022 में बड़े राजनीतिक नामों और पारंपरिक समीकरणों से अलग जाकर मतदाताओं ने जिस बदलाव को चुना था, उसके बाद राजनीतिक दल और उनके स्थानीय चेहरे कितनी जमीन बना पाए हैं।
2022 में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस 18 सीटों पर सिमट गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल को तीन और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। इस जनादेश ने पंजाब की राजनीति में लंबे समय से मौजूद सत्ता-समीकरणों को बड़ा झटका दिया था।
अब तस्वीर पहले जैसी नहीं है। AAP के सामने सरकार के कामकाज, रोजगार, कानून-व्यवस्था, किसानों, नशे और राज्य की वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर जवाब देने की चुनौती है। विपक्ष में कांग्रेस अपने अंदरूनी मतभेदों को साधने की कोशिश कर रही है। हाल में चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच समन्वय की कोशिशें भी सामने आई हैं।
दूसरी तरफ SAD अपने राजनीतिक आधार को फिर मजबूत करने में जुटा है और BJP के साथ संभावित तालमेल की चर्चा भी तेज है।
लेकिन 2027 का असली सवाल केवल पार्टियों का नहीं होगा। क्या पुराने नाम अपने व्यक्तिगत जनाधार को सीटों में बदल पाएंगे? क्या नए चेहरे मतदाताओं का भरोसा हासिल कर पाएंगे? और क्या 2022 का बदलाव पंजाब की स्थायी राजनीतिक प्रवृत्ति बनेगा या पांच साल बाद फिर समीकरण बदलेंगे?
इन सवालों का जवाब चुनावी मैदान, उम्मीदवारों और मतदाताओं के फैसले से ही मिलेगा।

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