भारतीय शेयर बाजार के लिए नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट ने कुछ अहम जोखिमों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की आपूर्ति में झटका, घरेलू प्रोत्साहन में कमी और वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ना भारत की आर्थिक और कारोबारी रिकवरी पर दबाव डाल सकता है।
नुवामा का अनुमान है कि तेल की ऊंची कीमतों का असर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही से कंपनियों के मुनाफे पर दिखाई दे सकता है। छोटे और मझोले आकार की कंपनियां तथा चक्रीय क्षेत्रों पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ने की आशंका जताई गई है। पहली तिमाही में इन्वेंटरी से मिले लाभ के बाद आगे मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट का दूसरा बड़ा खतरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ा है। नुवामा के अनुसार अगर वैश्विक एआई निवेश की रफ्तार और कमजोर होती है तो भारत के निर्यात, धातु कीमतों, कंपनियों के राजस्व और ऋण वृद्धि को नुकसान पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में हार्डवेयर तकनीकी शेयरों में तेज उछाल के बाद आई सुस्ती को 2000 के डॉट-कॉम दौर के समान देर-चक्र का संकेत बताया गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि 2000 जैसी बाजार दुर्घटना निश्चित है। भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है और हालिया आंकड़ों में आर्थिक वृद्धि तथा विदेशी निवेश में मजबूती दिखाई दी है।
इसलिए नुवामा की चेतावनी को बाजार में तत्काल मंदी की भविष्यवाणी के बजाय बढ़ते जोखिमों का संकेत समझना ज्यादा उचित होगा।

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