एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से जुड़े कथित 1,322 करोड़ रुपये के कर्ज घोटाले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला 31 अगस्त को एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की ओर से की गई शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, 2018 में चार कंपनियों को दो कर्ज सुविधाओं के तहत कुल 980 करोड़ रुपये दिए गए थे। इनमें एक सुविधा 500 करोड़ रुपये और दूसरी 480 करोड़ रुपये की थी। इन कर्जों के लिए सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी भी बताई गई है। बाद में दोनों कर्ज खाते डिफॉल्ट हो गए और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने ब्याज तथा अन्य शुल्क सहित 1,322 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप लगाया।
मामले का सबसे अहम बिंदु उनकी कथित नेटवर्थ को लेकर है। शिकायत के अनुसार, 2018 में जमा प्रमाणपत्रों में उनकी संपत्ति करीब 59,113 करोड़ रुपये और दूसरे प्रमाणपत्र में करीब 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, बाद की व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही में 2024 की नेटवर्थ 31.79 करोड़ रुपये बताई गई। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का आरोप है कि कथित रूप से बढ़ी हुई संपत्ति के दस्तावेजों के आधार पर कर्ज हासिल किया गया।
सीबीआई ने मामले में सुभाष चंद्रा के साथ संबंधित कंपनियों और उनके निदेशकों को भी आरोपी बनाया है। प्राथमिकी में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात सहित आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये फिलहाल जांच एजेंसी और शिकायतकर्ता के आरोप हैं; दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।

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