हूतियों और सरकारी सेना में भीषण संघर्ष, रणनीतिक ठिकानों पर कब्जे की जंग तेज
अदन। यमन में वर्षों से जारी संघर्ष एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। पश्चिमी प्रांत ताइज और होदेइदाह में हूती लड़ाकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की सेना के बीच पिछले चार दिनों से भीषण लड़ाई जारी है। चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक अब तक कम से कम 117 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 54 सरकारी सैनिक और 63 हूती सदस्य बताए जा रहे हैं। हालांकि युद्ध क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आंकड़ों की पुष्टि मुश्किल है।
सरकारी सेना ने दावा किया है कि उसने पश्चिमी ताइज में हूतियों के कब्जे वाले कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ऊंचाइयों को जवाबी कार्रवाई में वापस हासिल कर लिया है। दूसरी ओर, हूती लड़ाकों ने भी कुछ इलाकों में बढ़त बनाई है। सरकारी बलों ने होदेइदाह और ताइज में हूती ठिकानों पर हवाई हमले भी किए हैं।
इस संघर्ष की सबसे बड़ी चिंता बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर है। लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और जहाजरानी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस इलाके में हूतियों की सैन्य बढ़त से अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात पर खतरा बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के कार्यालय के अनुसार, नए संघर्ष के कारण 48 घंटे से भी कम समय में करीब 1,800 परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। कई विस्थापित परिवार युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं और राहत एजेंसियों के पास सहायता पहुंचाने की क्षमता भी सीमित होती जा रही है।
यमन में यह नया सैन्य उबाल 2022 के संघर्षविराम के बाद सबसे गंभीर जमीनी टकरावों में से एक माना जा रहा है। सवाल अब यही है—क्या यह लड़ाई सीमित मोर्चों तक रहेगी या यमन फिर व्यापक गृहयुद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा?

Post a Comment