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अनुमति खत्म, फिर भी निर्माण! मालवा वनस्पति की जमीन पर 10 साल पुराने सवाल फिर जिंदा

भागीरथपुरा | विशेष रिपोर्ट | प्रणव बजाज

भागीरथपुरा की मालवा वनस्पति एंड केमिकल प्राइवेट लिमिटेड की जमीन पर फ्लेटेड फैक्ट्री के प्रस्ताव और निर्माण अनुमति का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक करीब 9.584 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित विकास को लेकर 2019 में नगर निगम ने भवन अनुज्ञा जारी की, लेकिन अनुमति की शर्तों और विकास अनुज्ञा को लेकर विवाद इसके बाद लगातार चलता रहा। सार्वजनिक रिपोर्टों में भी इस जमीन के नक्शों, औद्योगिक उपयोग और कथित प्लॉटिंग को लेकर प्रशासनिक जांच का उल्लेख पहले हो चुका है।

2014 में उठी थी जमीन को लेकर आपत्ति

इस जमीन को लेकर वर्ष 2014 में ही सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद मामला केवल जमीन के उपयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नक्शे, विकास अनुज्ञा और निर्माण अनुमति तक पहुंच गया। 2020 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में प्रशासन द्वारा मालवा वनस्पति की जमीन के नक्शों की जांच किए जाने और सड़क-बगीचे की जमीन के कथित समायोजन से जुड़े सवालों का उल्लेख था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।

13 मई 2019 : निगम ने दी भवन अनुज्ञा

नगर निगम के उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार भवन अनुज्ञा क्रमांक 2475 दिनांक 13 मई 2019 को जारी हुई। इसमें ए से जी तक अलग-अलग ब्लॉक और उनके निर्माण क्षेत्र का उल्लेख था। लेकिन अनुमति के साथ महत्वपूर्ण शर्त भी थी—स्वीकृति मिलने के एक वर्ष के भीतर निर्माण शुरू करने की ऑनलाइन सूचना देना आवश्यक था। निर्धारित अवधि में कार्य प्रारंभ नहीं होने पर अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाने की शर्त दर्ज थी।


यहीं से असली सवाल शुरू होता है—क्या समय सीमा के भीतर निर्माण शुरू हुआ था? अगर हुआ तो उसकी सूचना निगम को कब दी गई?

नवंबर 2020 में निगम ने पूछा—अनुमति क्यों न निरस्त हो?

13 नवंबर 2020 को निगम की ओर से कंपनी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। इसमें नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की विकास अनुज्ञा से संबंधित कार्रवाई का हवाला देते हुए 13 मई 2019 की भवन अनुज्ञा निरस्त किए जाने के संबंध में जवाब मांगा गया।

कंपनी ने जवाब में कहा कि उसने विकास अनुज्ञा के विपरीत कोई कार्य नहीं किया है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय ने सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना विकास अनुज्ञा को प्रतिसंहत किया। कोरोना संक्रमण और कंपनी निदेशक की उम्र का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय भी मांगा गया।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा

इसके बाद कंपनी ने उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक 15549/2020 दायर की। बाद के निगम दस्तावेजों में 23 जून 2022 के नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय के पत्र का उल्लेख है। दस्तावेजों के अनुसार फ्लेटेड फैक्ट्री उपयोग के लिए सशर्त विकास अनुज्ञा बहाल की गई थी।

यानी 2019 की भवन अनुमति से शुरू हुआ विवाद 2020 में न्यायालय तक पहुंचा और 2022 में विकास अनुज्ञा की स्थिति में बदलाव हुआ।

फिर आया 30 अगस्त 2024 का मौका निरीक्षण

मामले का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजी बिंदु 30 अगस्त 2024 का मौका निरीक्षण है। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार निरीक्षण में पाया गया कि भवन अनुमति की अवधि समाप्त होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी था।


इसके बाद मौके पर निर्माण रुकवाया गया। कंपनी को सक्षम स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए और यह बताने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया कि स्वीकृति की शर्तों के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1966 और मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।


यही वह बिंदु है जहां 2019 की अनुमति, 2020 का विवाद, 2022 की विकास अनुज्ञा और 2024 का निर्माण एक ही कड़ी में जुड़ते दिखाई देते हैं।


अब जांच सिर्फ निर्माण की नहीं, पूरी फाइल की होनी चाहिए

इस मामले में वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए चार दस्तावेजों का मिलान निर्णायक होगा—2019 की भवन अनुज्ञा, 2022 में बहाल की गई विकास अनुज्ञा, 2024 का मौका निरीक्षण और उसके बाद निगम की कार्रवाई।


इसके साथ यह भी जांच का विषय है कि 9.584 हेक्टेयर भूमि का स्वीकृत उपयोग क्या था, स्वीकृत नक्शे में सड़क और खुले क्षेत्र कितने थे, वास्तविक मौके पर निर्माण कितना हुआ और किस तारीख को निर्माण प्रारंभ होने की सूचना निगम को दी गई।


सार्वजनिक रिकॉर्ड में शरद डोसी से जुड़े मालवा वनस्पति प्रकरण पर पूर्व में प्रशासनिक जांच और नक्शों से संबंधित सवालों का उल्लेख मिलता है। लेकिन किसी व्यक्ति को अवैध निर्माण या भूमाफिया गतिविधि का दोषी मानने से पहले संबंधित विभाग की अंतिम जांच और सक्षम प्राधिकारी का निष्कर्ष जरूरी है।


अब सवाल सीधा है—अगर अनुमति की अवधि खत्म हो चुकी थी तो निर्माण किस आधार पर चलता रहा? और यदि अनुमति वैध थी, तो 2024 में नगर निगम ने निर्माण क्यों रुकवाया?


इन दो सवालों के जवाब ही मालवा वनस्पति की पूरी फाइल का अगला अध्याय तय करेंगे।

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