झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला; 17 परीक्षाओं की जांच, छह भर्ती परीक्षाएं स्थगित
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद अब JSSC-CGL से आगे बढ़ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL समेत कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इसके अलावा छह परीक्षाएं स्थगित की गई हैं। सरकार ने 2014 से अब तक कराई गई 17 परीक्षाओं की जांच का भी आदेश दिया है
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सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्हें JSSC-CGL के जरिए नौकरी मिल चुकी थी। अलग-अलग रिपोर्टों में ऐसे चयनित अभ्यर्थियों की संख्या करीब 2,000 से 2,250 बताई जा रही है। नियुक्त कर्मचारी अब सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की सजा उन्हें क्यों दी जा रही है।
मामला केवल सीजीएल तक सीमित नहीं है। सरकार के फैसले के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाएं जांच के घेरे में हैं। इनमें वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक समेत कई पदों की भर्तियां शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टीडीपीएल के माध्यम से कराई गई कम से कम 15 प्रमुख भर्ती परीक्षाओं पर सीधा असर पड़ सकता है, जिनमें जेपीएससी की 10 और जेएसएससी की पांच परीक्षाएं बताई गई हैं। इनसे करीब सात हजार विज्ञापित या भरे गए पदों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
सरकार का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कठोर कदम जरूरी हैं। लेकिन दूसरी ओर पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों का सवाल है—गड़बड़ी अगर परीक्षा व्यवस्था में हुई है तो ईमानदारी से परीक्षा पास करने वालों का भविष्य क्यों दांव पर लगाया जा रहा है?
अब सबसे बड़ी चुनौती दोहरी है—दोषी व्यवस्था और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना तथा निर्दोष चयनित युवाओं के हितों की रक्षा करना।

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