Top News

तीस्ता पर बदले सुर, भारत-बांग्लादेश रिश्तों की नई परीक्षा

 


जमात फैक्टर के बीच प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा पर निगाहें; तीस्ता समझौता कितना बड़ा मुद्दा?


बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले ढाका ने तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर अपना रुख कुछ नरम किया है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने कहा है कि लंबे समय से लंबित तीस्ता जल बंटवारा समझौता दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों को नुकसान पहुंचाने का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने भारत से अपील की कि वह अपने हितों के साथ बांग्लादेश की जरूरतों को भी ध्यान में रखे।



तीस्ता इसलिए अहम है क्योंकि 2011 में समझौते का मसौदा तैयार होने के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन सकी। पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियां इस गतिरोध की प्रमुख वजह रही हैं। भारत-बांग्लादेश संबंधों में यह मुद्दा केवल पानी का सवाल नहीं, बल्कि सीमा, कृषि, सिंचाई और क्षेत्रीय राजनीति से भी जुड़ा है।


अब परिस्थिति और संवेदनशील हो गई है। बांग्लादेश में नई राजनीतिक व्यवस्था के बीच भारत से संबंध सुधारने की कोशिश हो रही है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में रहने और उनके प्रत्यर्पण की मांग ने रिश्तों में तनाव बनाए रखा है। बांग्लादेश ने भारत यात्रा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल की जरूरत भी जताई है।


तीस्ता में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक अलग रणनीतिक चिंता है। चीन समर्थित तीस्ता परियोजना भारत की सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र के करीब है। इसलिए ढाका का बदला हुआ बयान केवल जल विवाद नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में संतुलन साधने की कोशिश भी माना जा सकता है।


अब सवाल यह है कि क्या तीस्ता पर ढाका नरम पड़ेगा और क्या नई दिल्ली पानी के साथ राजनीति, सुरक्षा और पश्चिम बंगाल के हितों के बीच कोई नया रास्ता निकाल पाएगी?

Post a Comment

Previous Post Next Post