नई दिल्ली। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से डॉ. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना महज संगठनात्मक बदलाव नहीं माना जा रहा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
कौन हैं डॉ. तारिक मंसूर?
तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हैं। वे 2017 से 2023 तक एएमयू के कुलपति रहे। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मनोनीत किया गया और भाजपा संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। नई टीम में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से उनकी संगठनात्मक भूमिका को लगातार महत्व मिलने का संकेत मिलता है।
कुंवर बासित अली की जिम्मेदारी क्यों अहम?
बासित अली इससे पहले उत्तर प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में रहे हैं। अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि पार्टी के मुस्लिम संपर्क अभियान में उनकी भूमिका अब उत्तर प्रदेश से आगे पूरे देश में बढ़ेगी।
यूपी से दोनों चेहरे क्यों?
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के लिए प्रदेश की सामाजिक संरचना और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती है। ऐसे में दो मुस्लिम नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख स्थान देना पसमांदा मुस्लिमों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा लंबे समय से पिछड़े मुस्लिम समुदायों के बीच राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि केवल संगठन में पद देने से चुनावी परिणाम बदल जाएंगे, यह दावा अभी जल्दबाजी होगा। असली परीक्षा यह होगी कि ये दोनों नेता भाजपा का संदेश मुस्लिम समाज के किन वर्गों तक पहुंचा पाते हैं और क्या यह समर्थन मतदान व्यवहार में बदलता है।
यानी भाजपा का संदेश साफ है—2027 से पहले यूपी में सामाजिक समीकरणों की नई जमीन तलाशने की कोशिश तेज हो गई है।

Post a Comment