नई दिल्ली। एच1एन1 इन्फ्लुएंजा को आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह सांस से जुड़ा संक्रमण है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से तेजी से फैल सकता है। हालांकि ज्यादातर लोग करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इन्फ्लुएंजा कुछ मामलों में गंभीर बीमारी, निमोनिया और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति पैदा कर सकता है।
इसमें अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है।
बचाव के लिए हाथ नियमित रूप से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढंकना और बीमार होने पर घर पर रहना जरूरी है। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से भी बचना चाहिए। बीमार व्यक्ति के बेहद करीब जाने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
इन्फ्लुएंजा से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण माना जाता है। उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए सालाना फ्लू टीका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। एंटीवायरल दवाएं जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से दी जाती हैं।

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