प्रसव के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव बन सकता है कारण, कुछ महिलाओं में अस्थायी तो कुछ में स्थायी समस्या
नई दिल्ली। बच्चे के जन्म के बाद कुछ महिलाओं में थायरॉयड की गड़बड़ी सामने आती है। इसे पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस कहा जाता है। यह आमतौर पर प्रसव के बाद पहले साल में होती है और करीब 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं में देखी जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव होता है। प्रसव के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली फिर सक्रिय होती है और कुछ महिलाओं में यह प्रक्रिया थायरॉयड ग्रंथि पर हमला कर सकती है। जिन महिलाओं में टीपीओ एंटीबॉडी पहले से मौजूद हों, उनमें जोखिम अधिक रहता है।
इस समस्या में शुरुआत में धड़कन तेज होना, घबराहट, गर्मी अधिक लगना और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसके बाद थायरॉयड कम काम करने लगे तो वजन बढ़ना, ठंड लगना, कमजोरी और उदासी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई महिलाओं में लक्षण सामान्य प्रसवोत्तर थकान जैसे लगते हैं, इसलिए समस्या पहचान में नहीं आती।
बचाव और सावधानी
हर महिला में इसे रोकना संभव नहीं है। लेकिन जिन महिलाओं को पहले थायरॉयड की समस्या रही हो, पहले पोस्टपार्टम थायरॉयडाइटिस हो चुकी हो या ऑटोइम्यून बीमारी का इतिहास हो, उन्हें डॉक्टर की सलाह से टीएसएच और अन्य थायरॉयड जांच करानी चाहिए। खुद से आयोडीन या थायरॉयड की दवा लेना उचित नहीं है।

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