रील्स की लत: एक ही घर में रहते हैं लोग, फिर भी हो जाते हैं अनजान

 


लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की आदत बातचीत, ध्यान और रिश्तों की गुणवत्ता को कर सकती है प्रभावित


नई दिल्ली। मोबाइल पर कुछ मिनट रील देखने से शुरुआत होती है और पता ही नहीं चलता कि आधा घंटा या उससे ज्यादा समय निकल गया। यही आदत जब बार-बार दोहराई जाए और व्यक्ति परिवार, काम या पढ़ाई से ज्यादा स्क्रीन में व्यस्त रहने लगे, तो समस्या गंभीर हो सकती है।



2025 में प्रकाशित 71 अध्ययनों और करीब 98 हजार लोगों के विश्लेषण में अधिक शॉर्ट-वीडियो उपयोग का संबंध कमजोर ध्यान और आत्म-नियंत्रण के साथ पाया गया। शोध में तनाव और चिंता से भी संबंध सामने आया।


विशेषज्ञों के अनुसार रील्स का लगातार बदलता और तुरंत नया मनोरंजन देने वाला स्वरूप व्यक्ति को बार-बार अगला वीडियो देखने के लिए प्रेरित कर सकता है। इसका असर परिवार के साथ बिताए समय पर भी पड़ सकता है। घर में पति-पत्नी आमने-सामने बैठे हों, बच्चे पास हों, लेकिन हर व्यक्ति अपने फोन में व्यस्त हो तो बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।


एक अन्य हालिया विश्लेषण में समस्याग्रस्त शॉर्ट-वीडियो उपयोग का संबंध अकेलेपन से भी पाया गया। हालांकि शोध यह साबित नहीं करता कि रील्स ही अकेलेपन का एकमात्र कारण हैं।


बचाव: भोजन, पारिवारिक बातचीत और सोने से पहले फोन-मुक्त समय तय करें। नोटिफिकेशन बंद करें और रोज कुछ समय परिवार के साथ बिना मोबाइल बिताएं।

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