बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतिम फैसले तक रुकी प्रक्रिया; एलोपैथी दवाएं लिखने के अधिकार को लेकर डॉक्टर संगठनों और सरकार के बीच विवाद
महाराष्ट्र सरकार ने सीसीएमपी यानी आधुनिक औषध विज्ञान प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पूरा करने वाले होम्योपैथी चिकित्सकों के पंजीकरण की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल को निर्देश दिया है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के अंतिम फैसले और आगे के सरकारी निर्देश तक ऐसे चिकित्सकों को संबंधित प्रमाणपत्र जारी न किए जाएं।
यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र में सीसीएमपी पूरा करने वाले पात्र होम्योपैथी चिकित्सकों को सीमित दायरे में आधुनिक चिकित्सा पद्धति की दवाएं लिखने की अनुमति देने की व्यवस्था बनाई गई थी। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने जून में ऐसे चिकित्सकों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद भारतीय चिकित्सा संघ और निवासी डॉक्टर संगठनों ने इसका विरोध करते हुए मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा मानकों का मुद्दा उठाया।
मामला पहले से ही बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने इससे पहले पात्र सीसीएमपी चिकित्सकों के पंजीकरण पर रोक लगाने से इनकार किया था और अंतिम निर्णय तक प्रक्रिया को लेकर कानूनी स्थिति बनी हुई थी। अगस्त में इसी मुद्दे पर निवासी डॉक्टरों ने आंदोलन भी किया था, जिसे अदालत के हस्तक्षेप के बाद वापस लिया गया। अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित है।
सरकार के ताजा फैसले से फिलहाल दोनों पक्षों के बीच टकराव कुछ समय के लिए थम सकता है, लेकिन मूल विवाद बरकरार है। सवाल अब यह है कि अंतिम फैसला होम्योपैथी चिकित्सकों के सीमित अधिकारों को मान्यता देगा या आधुनिक चिकित्सा के अभ्यास के लिए अलग और अधिक कठोर मानक तय करेगा?

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