50 से ज्यादा कथित मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क; भोपाल-मुंबई में छापे, 1.53 करोड़ नकद, विदेशी मुद्रा, सोना-चांदी और नौ महंगी गाड़ियां जब्त
सागा समूह से जुड़े कथित पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्य नियंत्रक बताए जा रहे समीर अग्रवाल पर शिकंजा कस दिया है। भोपाल और मुंबई में समूह से जुड़े ठिकानों पर हुई तलाशी में ईडी ने करीब 37 करोड़ रुपये की संपत्ति और अन्य सामान जब्त अथवा फ्रीज किया है। जांच में 50 से ज्यादा कथित मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क सामने आने की बात कही गई है।
ईडी की कार्रवाई में सबसे बड़ी बरामदगी वित्तीय संपत्तियों की बताई गई है। एजेंसी ने 30 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर, प्रतिभूतियां, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसियां और बैंक खातों में जमा रकम फ्रीज की है। इसके अलावा नौ महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।
तलाशी के दौरान 1.53 करोड़ रुपये नकद और करीब 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा बरामद होने की जानकारी है। वहीं लगभग 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और चांदी की ईंटें भी जांच के दायरे में आई हैं।
50 से ज्यादा कंपनियां, पैसा किसका और कहां गया?
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कथित शेल कंपनियों का नेटवर्क है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कंपनियों के बीच रकम का लेन-देन किस तरीके से हुआ और क्या इनका इस्तेमाल निवेशकों से जुटाए गए धन को अलग-अलग परिसंपत्तियों में लगाने या छिपाने के लिए किया गया।
समीर अग्रवाल की भूमिका इसलिए जांच के केंद्र में है क्योंकि उन्हें समूह का मुख्य नियंत्रक बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह देश से बाहर हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।
अब निवेशकों के पैसे की बारी
ईडी की कार्रवाई से संपत्तियां जब्त या फ्रीज होने का रास्ता खुला है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल निवेशकों की रकम को लेकर है। यदि जांच में पोंजी योजना के आरोप साबित होते हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि कितनी रकम जुटाई गई, कितने निवेशक प्रभावित हुए और धन को किन-किन कंपनियों, खातों और संपत्तियों के जरिए घुमाया गया।
बौद्धिक प्रतिकार की पड़ताल का सीधा सवाल—समीर अग्रवाल तक पहुंची जांच अब उन 50 से ज्यादा कथित कंपनियों के पीछे मौजूद असली चेहरों तक कब पहुंचेगी? और जिन लोगों ने पैसा लगाया, उन्हें उनकी रकम कब वापस मिलेगी?

Post a Comment