Top News

खदानों पर टैक्स की ‘चाबी’ केंद्र के हाथ में! राज्यों के अधिकार सीमित करने की तैयारी

 

खनिज अधिकार और खनिज-युक्त जमीन पर कर, उपकर व दूसरे शुल्क लगाने की राज्यों की शक्ति रोकने का प्रस्ताव


नई दिल्ली। देश के खनन क्षेत्र में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। केंद्र सरकार ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया है। इसका एक महत्वपूर्ण प्रावधान राज्यों की ओर से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त जमीन पर लगाए जाने वाले कर, उपकर या अन्य शुल्क को सीमित करना है।



सरकार का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में खनन पर कई तरह के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से उद्योग की लागत बढ़ती है। इससे खनन परियोजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर पड़ सकती हैं और कुछ मामलों में खदानें बंद होने की स्थिति भी बन सकती है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य पूरे देश में एक समान और अनुमानित वित्तीय व्यवस्था तैयार करना बताया गया है।


मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में खनिज अधिकारों पर कर लगाने की राज्यों की संवैधानिक शक्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया था। अदालत ने संविधान की राज्य सूची की प्रविष्टि 50 और खनिज विकास से जुड़े कानूनों के संदर्भ में राज्यों की भूमिका पर विस्तार से विचार किया था।


अब प्रस्तावित संशोधन से केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व और अधिकारों को लेकर नया विवाद खड़ा हो सकता है। खासकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के लिए इसका वित्तीय असर महत्वपूर्ण हो सकता है।


बड़ा सवाल: खनिज संपदा जिस राज्य की जमीन से निकलती है, उसके राजस्व पर फैसला लेने की ताकत कितनी राज्य सरकारों के पास रहेगी?

Post a Comment

Previous Post Next Post