अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। 8 अगस्त को ईरान ने कहा कि ओमान के साथ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन को लेकर समझौते के करीब पहुंचा जा रहा है, लेकिन केवल इस समझौते से जलमार्ग पूरी तरह खोलना संभव नहीं होगा।
कच्चे तेल में फिर बढ़ी हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को ब्रेंट कच्चा तेल करीब 1.3 प्रतिशत बढ़कर 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल करीब 77.06 डॉलर प्रति बैरल रहा। बाजार की नजर अब ईरान-अमेरिका बातचीत और होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही पर है।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
तेल बाजार में हलचल के बावजूद 9 अगस्त 2026 को भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का तत्काल असर भारतीय उपभोक्ताओं पर दिखाई नहीं दिया।
आगे क्या हो सकता है?
भारत कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान रहने पर आयात लागत और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ती है और जलमार्ग पर आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
फिलहाल 9 अगस्त को वाहन चालकों के लिए राहत यही है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता पर नजर बनी हुई है।

Post a Comment