आज, 3 अगस्त से भारतीय शेयर बाजार में कई अहम बदलाव लागू हो गए हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एफ एंड ओ (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) वाले शेयरों के लिए नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) लागू किया है और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय भी बढ़ा दिया है। इन बदलावों का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
क्या-क्या बदला?
1. एफ एंड ओ शेयरों के लिए नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन
अब एफ एंड ओ श्रेणी के शेयरों में लगातार ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे समाप्त होगी। इसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के जरिए अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय की जाएगी।
2. डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय बढ़ा
इक्विटी डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) में ट्रेडिंग अब दोपहर 3:40 बजे तक चलेगी। पहले यह 3:30 बजे तक होती थी।
3. क्लोजिंग प्राइस तय करने का तरीका बदला
पहले क्लोजिंग प्राइस अंतिम 30 मिनट के औसत मूल्य (वीडब्ल्यूएपी) से तय होती थी। अब एफ एंड ओ वाले शेयरों में यह क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान खरीदार और विक्रेता के संतुलित मूल्य के आधार पर तय होगी।
निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ेगा?
क्लोजिंग प्राइस में पारदर्शिता बढ़ेगी।
अंतिम मिनटों में कीमतों में हेरफेर की संभावना कम होगी।
एफ एंड ओ ट्रेडर्स को पोजिशन मैनेज करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
म्यूचुअल फंड, इंडेक्स फंड और बड़े संस्थागत निवेशकों को अधिक सटीक क्लोजिंग प्राइस का लाभ मिल सकता है।
क्यों किया गया यह बदलाव?
सेबी का मानना है कि नई व्यवस्था से बाजार में बेहतर प्राइस डिस्कवरी, अधिक पारदर्शिता और वैश्विक मानकों के अनुरूप ट्रेडिंग व्यवस्था विकसित होगी, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।

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