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प्रोस्टेट कैंसर के इन संकेतों को पुरुष अक्सर कर देते हैं नजरअंदाज, डॉक्टर की सलाह जरूरी

प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती दौर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता। यही वजह है कि कई पुरुष पेशाब में आए छोटे बदलावों को उम्र बढ़ने या सामान्य प्रोस्टेट समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। 



पेशाब की धार कमजोर होना


अगर पेशाब की धार पहले की तुलना में कमजोर हो गई है, पेशाब शुरू करने में परेशानी होती है या बीच-बीच में रुकती है, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर न छोड़ें। हालांकि, ऐसे लक्षण प्रोस्टेट कैंसर के अलावा बढ़े हुए प्रोस्टेट जैसी सामान्य गैर-कैंसर वाली समस्या में भी हो सकते हैं। 


रात में बार-बार पेशाब आना


बार-बार रात में उठकर पेशाब करना भी प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। लगातार ऐसा हो रहा है तो चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।


पेशाब में खून


पेशाब में खून दिखाई देना सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। 


वीर्य में खून


वीर्य में खून आना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर बार इसका कारण कैंसर नहीं होता, लेकिन लगातार या दोबारा ऐसा होने पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। 


इरेक्शन में परेशानी


इरेक्शन हासिल करने या बनाए रखने में परेशानी प्रोस्टेट कैंसर के अलावा कई दूसरी वजहों से हो सकती है। फिर भी अगर यह समस्या नई है और लगातार बनी हुई है तो डॉक्टर से बात करना उचित है। 


कमर या कूल्हे में लगातार दर्द


प्रोस्टेट कैंसर के आगे बढ़ने पर कमर, कूल्हे या हड्डियों में दर्द हो सकता है। बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार दर्द और साथ में अन्य लक्षण हों तो जांच कराना जरूरी है। 


अचानक वजन कम होना


बिना कोशिश के वजन कम होना और लगातार थकान जैसे लक्षण उन्नत बीमारी में दिखाई दे सकते हैं, हालांकि इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। 


सबसे जरूरी बात—लक्षण न हों तब भी जोखिम समझें


प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती मामलों में लक्षण नहीं होने के कारण केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी को पकड़ना संभव नहीं है। उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे जोखिमों को ध्यान में रखकर डॉक्टर से स्क्रीनिंग पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है। 


पीएसए यानी प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन की रक्त जांच स्क्रीनिंग में इस्तेमाल की जाती है। लेकिन पीएसए बढ़ना अपने आप कैंसर साबित नहीं करता—बढ़ा हुआ प्रोस्टेट या प्रोस्टेट में सूजन जैसी स्थितियां भी पीएसए बढ़ा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर आगे की जांच और बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है। 


अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार सामान्य जोखिम वाले पुरुषों को 50 वर्ष की उम्र से डॉक्टर के साथ स्क्रीनिंग के फायदे-नुकसान पर चर्चा करनी चाहिए। अधिक जोखिम वाले पुरुषों में यह चर्चा इससे पहले की जाती है। 


याद रखें: पेशाब में बदलाव का मतलब यह नहीं कि आपको प्रोस्टेट कैंसर है, लेकिन लगातार बने रहने वाले या नए लक्षणों को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। सही जांच ही वास्तविक कारण स्पष्ट कर सकती है।

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