नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज की ओर से कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग सामने आई है। उनका कहना है कि राष्ट्रगीत को लेकर कांग्रेस के पुराने रुख और उस पर हुई राजनीतिक बहस ने स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
यह विवाद उस समय और गहरा गया है जब देश ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में देशभक्ति की भावना जगाने वाला महत्वपूर्ण प्रतीक रहा। 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया था और 1950 में संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया।
दरअसल, 1937 में राष्ट्रगीत के कुछ अंशों को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में संसद में इसी घटनाक्रम को कांग्रेस की ऐतिहासिक भूल बताते हुए निशाना साधा। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि उस समय निर्णय के पीछे विभिन्न समुदायों की भावनाओं और रवींद्रनाथ ठाकुर की सलाह जैसे कारण भी थे।
बंकिम परिवार के वंशज सजल चट्टोपाध्याय पहले भी कह चुके हैं कि बंकिम चंद्र की विरासत को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला। हालांकि उन्होंने यह भी अपील की थी कि ‘वंदे मातरम्’ को राजनीतिक विवाद से ऊपर रखा जाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि राष्ट्रगीत को लेकर इतिहास की बहस कब तक राजनीतिक अखाड़ा बनी रहेगी?
**शहीदों के गीत पर राजनीति करने वालों से बड़ा सवाल यही है—वंदे मातरम् को सम्मान चाहिए या फिर हर चुनाव में एक नया विवाद?**

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