चाकण से उद्योगों का पलायन? जाम ने खोली विकास की पोल



पुणे। महाराष्ट्र के चाकण औद्योगिक क्षेत्र में लगातार बढ़ती यातायात समस्या अब उद्योगों के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने शनिवार को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्र का दौरा कर उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 कंपनियां चाकण से खंडाला की ओर जाने की तैयारी में हैं, जिससे लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। 


उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार चाकण-पिंपरी-पुणे औद्योगिक गलियारे में रोजाना लंबा जाम लग रहा है। कई कर्मचारियों और मालवाहक वाहनों को दो से तीन घंटे तक सड़क पर फंसना पड़ता है। इसका सीधा असर उत्पादन, माल की आवाजाही और कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। दूसरी रिपोर्ट में कंपनियों की ओर से करीब 2,000 कर्मचारियों के रोजगार पर तत्काल असर की आशंका भी जताई गई है। 


ठाकरे ने उद्योगों को रोकने के लिए केवल तात्कालिक उपायों के बजाय स्थायी बुनियादी ढांचा विकसित करने की मांग की। उद्योग प्रतिनिधियों ने चाकण-पिंपरी-पुणे के बीच मेट्रो या तीव्र रेल संपर्क तथा सार्वजनिक बस सेवा बढ़ाने का सुझाव दिया।


मामला सिर्फ सड़क के जाम का नहीं है। महाराष्ट्र के एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में यदि कंपनियां बेहतर सुविधाओं के लिए दूसरे स्थानों का रुख करती हैं, तो इसका असर निवेश, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


विडंबना यही है—उद्योग लाने के लिए जमीन और नीतियां तैयार हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए सड़कें तैयार नहीं।


सरकार के सामने अब सवाल साफ है: **चाकण में कंपनियां बचेंगी या जाम के साथ रोजगार भी बाहर जाएगा?**

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