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एक्स पर सरकार का रुख सख्त: भारतीय कानून मानना होगा, पारदर्शिता नीति पर बढ़ा विवाद

 

एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया मंच एक्स ने सरकारी निर्देशों पर हटाई या प्रतिबंधित की गई सामग्री को लेकर उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक पारदर्शिता लाने की नीति शुरू करने की घोषणा की है। एक्स का उद्देश्य यह बताना है कि किसी सामग्री पर कार्रवाई किस सरकार के अनुरोध पर हुई और उसके पीछे क्या कारण था।



इसी मुद्दे पर भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि एक्स को भारत में काम करते समय देश के कानूनों का पालन करना होगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 18 अगस्त को कहा कि मंच को भारतीय कानूनों का अनुपालन करना ही होगा।


विवाद की अहम कड़ी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए और उससे जुड़े 2009 के नियम हैं। इनके तहत कुछ परिस्थितियों में सरकार सामग्री को अवरुद्ध करने के निर्देश दे सकती है। संबंधित नियमों में ऐसे आदेशों की गोपनीयता का प्रावधान भी है। ऐसे में यदि एक्स हर सरकारी कार्रवाई को सार्वजनिक रूप से बताने की कोशिश करता है, तो भारत में उसकी पारदर्शिता नीति और कानूनी गोपनीयता के बीच टकराव पैदा हो सकता है।


यह विवाद केवल एक्स और सरकार के बीच मतभेद नहीं है। इसके केंद्र में बड़ा सवाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सरकारी नियमन, मंचों की जवाबदेही और राष्ट्रीय कानूनों के पालन का है।


एक्स वैश्विक स्तर पर सरकारी हस्तक्षेप को अधिक पारदर्शी बनाना चाहता है, जबकि भारत का रुख है कि पारदर्शिता की कोई भी व्यवस्था देश में लागू कानून की सीमाओं के भीतर ही हो सकती है।


अब देखना होगा कि एक्स अपनी वैश्विक नीति को भारतीय कानूनी व्यवस्था के अनुरूप किस तरह लागू करता है।

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