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विझिंजम बंदरगाह से भारत की समुद्री ताकत को नई दिशा, विदेशी केंद्रों पर निर्भरता घटेगी

 


केरल के विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह ने 18 अगस्त 2026 से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ भारत को अपने निर्यात और आयात माल के लिए विदेशी ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का एक बड़ा विकल्प मिला है। अब बंदरगाह केवल अंतरराष्ट्रीय जहाजों के बीच माल स्थानांतरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत से बाहर जाने और देश में आने वाले माल को भी सीधे संभालेगा।



विझिंजम की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत इसकी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के बेहद करीब स्थित गहरी जलराशि है। यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता है। बंदरगाह की वेबसाइट के अनुसार इसका उद्देश्य भारतीय और क्षेत्रीय माल को मुख्य समुद्री मार्गों से जोड़ना और विदेशी ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के मुकाबले लागत तथा समय कम करना है।


इस परियोजना में अदाणी समूह की बड़ी भूमिका है। अदाणी पोर्ट्स ने जनवरी 2026 में विझिंजम के दूसरे चरण के विस्तार के लिए 16,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। विस्तार पूरा होने के बाद वार्षिक क्षमता बढ़कर करीब 57 लाख टीईयू होने का लक्ष्य है। इसके तहत अतिरिक्त कंटेनर बर्थ, रेल संपर्क, सड़क ढांचा और लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।


यानी विझिंजम सिर्फ केरल का बंदरगाह नहीं, बल्कि भारत के समुद्री व्यापार को देश के भीतर मजबूत करने की रणनीतिक कोशिश बन रहा है। असली परीक्षा अब यह होगी कि कितनी मात्रा में भारतीय निर्यात-आयात सीधे यहां से संचालित होता है और इससे कारोबारियों की लागत कितनी घटती है।

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