न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन’ में विविधता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में भारतीय मूल के हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया।
अपने संबोधन की शुरुआत में भागवत ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता से जुड़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग पहचान और आस्थाओं के बावजूद समाज को एक-दूसरे के सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
‘विविधता को स्वीकार करना होगा’
भागवत ने कहा कि विविधता को केवल स्वीकार करना ही नहीं, बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण भी जरूरी है। उनके अनुसार व्यक्ति को अपनी पहचान के साथ-साथ दूसरों की पहचान की भी रक्षा करनी चाहिए। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश भी ‘एकता’ और वैश्विक सद्भाव पर आधारित रहा।
इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी मंच साझा किया। रिपोर्ट के मुताबिक 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेताओं ने शांति और सद्भाव को लेकर पांच सूत्रीय कार्ययोजना पर सहमति जताई।
भागवत ने अपने संदेश में धर्म के नाम पर नफरत को बढ़ावा देने के बजाय संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंसान अक्सर ‘मैं’ और ‘मेरा’ की सीमाओं में उलझ जाता है, जबकि व्यापक मानवता की भावना समाज को जोड़ने का काम करती है।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन का यह आयोजन ऐसे समय हुआ जब भागवत की अमेरिका यात्रा को लेकर समर्थन और विरोध दोनों देखने को मिले थे। इसके बावजूद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भागीदारी रही।

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