नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने और अमेरिका से कई मांगें मनवाने की कोशिश के बीच खाड़ी देशों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता जताई है।
ईरान की रणनीति का केंद्र होर्मुज
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका के सैन्य दबाव और प्रतिबंधों के रहते होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सामान्य करना आसान नहीं होगा। तेहरान प्रतिबंध हटाने, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा और ईरानी जमी हुई संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठा रहा है।
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने का सीधा असर कच्चे तेल की आपूर्ति, समुद्री परिवहन और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
खाड़ी देश क्यों चिंतित हैं?
ईरान और अमेरिका की सीधी टक्कर का सबसे बड़ा जोखिम उन अरब देशों को है जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान हैं। हाल के महीनों में खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और समुद्री हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। यूएई ने अपने एक तेल जहाज को ईरानी मिसाइल से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है।
यही वजह है कि सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देश किसी भी नए सैन्य विस्तार को लेकर सतर्क हैं।
अमेरिका पर हमले की खबरों में सावधानी जरूरी
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में अमेरिका के कई बड़े शहरों को ईरान के संभावित निशाने के रूप में बताया जा रहा है। हालांकि ऐसे सात अमेरिकी शहरों की कोई आधिकारिक, विश्वसनीय सूची अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे निश्चित ईरानी हमले की योजना बताना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में ईरान का दबाव मुख्यतः अमेरिकी सैन्य मौजूदगी, खाड़ी क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों पर केंद्रित दिखाई देता है।
यूएई से सोना और रकम ईरान पहुंचने का दावा भी अपुष्ट
कुछ रिपोर्टों में यूएई से ईरान को सोना और बड़ी रकम पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इसे खबर में स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
हालांकि ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा बातचीत में जरूर प्रमुख है। तेहरान इन्हें वापस हासिल करने की मांग कर रहा है।
असली खतरा युद्ध से ज्यादा ऊर्जा आपूर्ति का
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। 14 अगस्त को भी अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई।
इस समय सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ईरान अमेरिका के कितने शहरों को निशाना बनाएगा, बल्कि यह है कि क्या दोनों देश तनाव को खाड़ी की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े संकट में बदलने से रोक पाएंगे।

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