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फाइबर कम हुआ तो बिगड़ सकता है पाचन

फाइबर को अक्सर केवल कब्ज दूर करने वाले पोषक तत्व के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। यह पौधों से मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट है, जिसे शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता। फिर भी आंतों की सेहत से लेकर रक्त शर्करा और हृदय स्वास्थ्य तक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है।



पेट के लिए जरूरी


फाइबर मल को नरम और उसका आकार बढ़ाने में मदद करता है, जिससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बीज इसके अच्छे स्रोत हैं। आहार में फाइबर बढ़ाते समय पानी भी पर्याप्त मात्रा में पीना जरूरी है।


वजन नियंत्रित रखने में मदद


फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास दे सकते हैं। इससे बार-बार खाने और अनावश्यक कैलोरी लेने की संभावना कम हो सकती है। वजन घटाने के लिए केवल फाइबर पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।


ब्लड शुगर पर असर


घुलनशील फाइबर भोजन के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर सकता है। इससे खाने के बाद रक्त शर्करा तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। डायबिटीज वाले लोगों के लिए भी उच्च फाइबर वाला संतुलित आहार उपयोगी हो सकता है।


दिल के लिए भी फायदेमंद


ओट्स, जौ, दाल और कुछ फलों में पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर रक्त में एलडीएल यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है।


कितना फाइबर लें?


वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर रोजाना करीब 25–30 ग्राम फाइबर लेने की सलाह दी जाती है, हालांकि जरूरत उम्र, लिंग और कुल आहार के अनुसार बदल सकती है। फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाएं, वरना गैस और पेट फूलने की शिकायत हो सकती है।


आसान तरीका: सफेद ब्रेड या मैदा आधारित चीजों की जगह साबुत अनाज, रोज फल-सब्जियां और नियमित रूप से दाल या बीन्स को भोजन में शामिल करें।

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