भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैसले का असर केवल कर्ज लेने वालों पर ही नहीं, बल्कि बैंकों में जमा राशि रखने वाले करोड़ों ग्राहकों पर भी पड़ता है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव होगा या मौजूदा व्यवस्था बरकरार रहेगी।
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो दर में बदलाव किए बिना उसे मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। यदि ऐसा होता है तो बैंकों की सावधि जमा और बचत खातों की ब्याज दरों में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना कम रहेगी।
विश्लेषकों का कहना है कि जमा पर मिलने वाला ब्याज केवल रेपो दर से तय नहीं होता। प्रत्येक बैंक अपनी धन की आवश्यकता, बाजार की स्थिति, तरलता और कारोबारी रणनीति के आधार पर जमा दरों में समय-समय पर बदलाव करता है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि भविष्य में महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है या मौद्रिक नीति का रुख बदलता है, तो बैंकों की जमा और ऋण दोनों की ब्याज दरों पर उसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
रिजर्व बैंक के नीति निर्णय के साथ जारी आर्थिक संकेतों को बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन्हीं संकेतों के आधार पर आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा और बैंकिंग क्षेत्र की रणनीति तय होने की संभावना है।

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