संसद में प्रस्तुत नए विधेयक के बाद डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। प्रस्तावित बदलाव के चलते यह चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में यूपीआई के माध्यम से होने वाले कुछ लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।
वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार प्रस्ताव का उद्देश्य मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव करना है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी यूपीआई लेनदेन पर तुरंत शुल्क लग जाएगा। यदि भविष्य में कोई शुल्क व्यवस्था लागू की जाती है तो उसके लिए अलग नियम, अधिसूचना या नियामकीय निर्णय आवश्यक होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सामान्य उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान बिना किसी शुल्क के उपलब्ध है। नए विधायी प्रावधानों के बाद भी अंतिम निर्णय सरकार, नियामक संस्थाओं और संबंधित वित्तीय तंत्र द्वारा तय किया जाएगा।
बैंकिंग क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विस्तार बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में यदि भविष्य में किसी प्रकार का शुल्क लागू करने पर विचार होता है तो उसकी सीमा, दायरा और लागू होने की शर्तें स्पष्ट रूप से घोषित की जाएंगी।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई के उपयोग संबंधी मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल बदलाव लागू नहीं हुआ है। इसलिए केवल प्रस्तावित विधायी परिवर्तन के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि हर यूपीआई भुगतान पर अब शुल्क देना पड़ेगा।

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