लाल सागर में फिर बढ़ा खतरा: हूतियों के निशाने पर सऊदी तेल कारोबार, जहाजों की निगरानी बंद

यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद सऊदी टैंकरों ने बदला रास्ता, कई जहाजों ने पहचान प्रणाली बंद की; वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बढ़ा दबाव


नई दिल्ली। बौद्धिक प्रतिकार



पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से जुड़े समुद्री और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकी के साथ हमले तेज किए हैं। 11 अगस्त को बाब-अल-मंदेब के पास एक मालवाहक जहाज पर हूती हमला हुआ, जिसमें कई चालक दल के सदस्यों की मौत की खबर है।


हालिया घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर सऊदी अरब के लाल सागर से होने वाले तेल निर्यात पर पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक कई सऊदी तेल टैंकरों ने अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली बंद कर दी है, ताकि उनकी स्थिति सार्वजनिक रूप से ट्रैक न की जा सके। सऊदी अरब ने कुछ तेल खेपों को लाल सागर के रास्ते के बजाय वैकल्पिक मार्गों से भेजना भी शुरू किया है।


सऊदी तेल ठिकाने भी निशाने पर


9 अगस्त को हूतियों ने सऊदी अरब के जिजान स्थित अरामको तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन हमला करने का दावा किया था। सऊदी पक्ष ने प्रतिष्ठान में लगी आग को नियंत्रित किए जाने की जानकारी दी थी। इसके अलावा लाल सागर के यानबू बंदरगाह को लेकर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं।


20 जुलाई से हूतियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध की घोषणा के बाद तनाव लगातार बढ़ा है। इसके चलते कई बड़े तेल टैंकर बाब-अल-मंदेब से गुजरने से बच रहे हैं। युद्ध जोखिम बीमा की लागत बढ़ने और जहाजों के मार्ग बदलने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।


क्या फिर बनेगा वैश्विक व्यापार संकट?


लाल सागर यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है। यदि बाब-अल-मंदेब में खतरा लंबे समय तक बना रहता है तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और ईंधन लागत दोनों बढ़ते हैं।


मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पश्चिम एशिया में पहले से ही समुद्री मार्गों पर तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी हाल में काफी नीचे गई है। ऐसे में लाल सागर में नए हमले वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर सकते हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी जहाजों और तेल प्रतिष्ठानों पर बढ़ते हमले केवल यमन-सऊदी संघर्ष तक सीमित रहेंगे या लाल सागर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए युद्ध क्षेत्र बन जाएगा?


फिलहाल स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि तेल कंपनियां और जहाज संचालक अपने मार्ग, निगरानी व्यवस्था और बीमा रणनीति बदल रहे हैं। यदि हमलों का सिलसिला बढ़ा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया पर नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमत, माल ढुलाई और एशिया-यूरोप व्यापार पर भी पड़ सकता है।

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