दो साल बाद फिर खुलेगी आरजी कर दुष्कर्म-हत्याकांड की फाइल, नए सिरे से होगी जांच

 

कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक के दुष्कर्म और हत्या के मामले में दो साल बाद जांच का दायरा एक बार फिर बढ़ गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय पहले ही मामले में कथित साक्ष्य दबाने और जांच में गंभीर चूक के आरोपों की दोबारा पड़ताल के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित करने का निर्देश दे चुका है। 



मामला अगस्त 2024 का है, जब आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे और जांच को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे।


मां की मांग के बाद न्याय की उम्मीद


मृतका की मां रत्ना देबनाथ अब भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं। उन्होंने लगातार अपनी बेटी के लिए न्याय और मामले से जुड़े सभी आरोपों की जांच की मांग उठाई है। मई 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात कर भी मामले में कार्रवाई की मांग की थी। 


पुलिस अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई


मामले की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने मई में तीन वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को निलंबित किया था। इनमें तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल भी शामिल थे। सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी। 


जांच में क्या-क्या देखा जाएगा?


उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार नई विशेष जांच टीम घटना की रात से लेकर अगले दिन शव के अंतिम संस्कार तक की घटनाओं की कड़ियों की जांच करेगी। कथित साक्ष्य से छेड़छाड़ और मामले को दबाने के प्रयासों के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। 


अब फिर उठेंगे पुराने सवाल


नई जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि शुरुआती जांच में कहीं कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट तो नहीं गया और क्या साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई थी। ऐसे में दो साल पुराने इस मामले में एक बार फिर कई दबे सवाल सामने आने की संभावना है।

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