Top News

बच्चों का ब्रेनवॉश’ कराने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से किया इनकार

 ‘

धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण और निगरानी की मांग; कोर्ट ने कहा—पहले पुराने आदेश को लागू कराएं


नई दिल्ली। अल्पसंख्यक और अन्य धार्मिक शिक्षण संस्थानों में बच्चों को कथित रूप से कट्टरपंथी बनाने के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की थी। उनका आरोप था कि कुछ गैर-पंजीकृत संस्थानों में धार्मिक शिक्षा की आड़ में बच्चों का कथित “ब्रेनवॉश” किया जा रहा है और राज्य स्तर पर पर्याप्त निगरानी नहीं है।



याचिका में मांग की गई थी कि 14 वर्ष तक के बच्चों को धार्मिक या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का पंजीकरण, मान्यता और निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत मिलने वाले अधिकारों को लेकर भी न्यायिक निर्देश मांगे गए थे।


जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि इसी मुद्दे पर पहले भी याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले दिए गए आदेश को लागू कराने का रास्ता अपनाने की सलाह दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।


अदालत ने इस स्तर पर याचिका में लगाए गए ब्रेनवॉश के आरोपों पर कोई फैसला नहीं दिया। इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता।

Post a Comment

Previous Post Next Post