काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में फिर से हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। कई हिंदू संगठनों ने नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठाई है। इस मुद्दे को लेकर सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
नेपाल के तराई क्षेत्र और भारत से लगे इलाकों में सक्रिय संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। दूसरी ओर नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है और हिंदू राष्ट्र की वापसी के पक्ष में सरकार नहीं है।
भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार से सटे सीमावर्ती जिलों में गश्त बढ़ाई गई है तथा संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक बहस तेज
नेपाल वर्ष 2008 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित हुआ था। इससे पहले नेपाल विश्व का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था। अब हिंदू राष्ट्र की मांग फिर उठने से देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समर्थक इसे नेपाल की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ रहे हैं, जबकि सरकार इसे संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा विषय बता रही है।
सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
भारत की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य फोकस यह है कि किसी भी तरह का तनाव सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में न फैले। सीमावर्ती जिलों में पुलिस और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बौद्धिक प्रतिकार विशेष टिप्पणी:
नेपाल का हिंदू राष्ट्र वाला मुद्दा केवल धार्मिक बहस नहीं, बल्कि वहां की राजनीति, पहचान और संविधान से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा नेपाल की आंतरिक राजनीति और भारत-नेपाल संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

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