फर्जी दस्तावेज, नकली सील और जाली हस्ताक्षर के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
प्रणव बजाज
भोपाल। राजधानी भोपाल के सबसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल एमपी नगर की करोड़ों रुपये की कमर्शियल संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अजीता वाजपेयी पांडे के पति अमित पांडे सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
मामला एमपी नगर जोन-1 स्थित डायनेमिक सेंटर नामक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन की संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि संपत्ति के अधिकार को लेकर फर्जी दस्तावेजों, नकली मुहरों और कथित जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया।
करोड़ों की संपत्ति पर किसका अधिकार?
जानकारी के अनुसार, इस संपत्ति का मालिकाना हक पहले रंजीत शाह के नाम था। वर्ष 2016 में उनके निधन के बाद संपत्ति से जुड़े अधिकारों को लेकर विवाद शुरू हुआ। बाद में भोपाल विकास प्राधिकरण द्वारा लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रवीण शर्मा के पक्ष में की गई।
इसके बाद अमित पांडे द्वारा न्यायालय में दावा पेश किया गया। हालांकि, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने वर्ष 2020 में उनके दावे को खारिज करते हुए प्रवीण शर्मा के पक्ष में फैसला दिया था।
दस्तावेजों में मिलीं कई गंभीर खामियां
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दस्तावेजों को लेकर कई सवाल उठे। आरोप है कि एक अनुबंध पत्र में बाद में अतिरिक्त दुकानों को जोड़ा गया, जबकि उनका मूल विवाद से कोई संबंध नहीं था।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार—
एक ही तारीख वाले स्टांप पेपर में समान नंबर पाए गए।
दस्तावेजों पर लगी कुछ मुहरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे।
स्टांप नंबर में बदलाव किए जाने के संकेत मिले।
कथित हस्ताक्षरों की तुलना बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से की गई, जिसमें अंतर मिलने का दावा किया गया।
पुलिस कार्रवाई में देरी पर कोर्ट नाराज
पीड़ित पक्ष के अनुसार, प्रवीण शर्मा ने जून 2024 में एमपी नगर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई।
जब कार्रवाई नहीं हुई तो मामला अदालत पहुंचा। कोर्ट ने दस्तावेजों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
अब पुलिस की परीक्षा
अदालत के आदेश के बाद एमपी नगर थाना पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अब जांच एजेंसी को दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों की जांच और संपत्ति से जुड़े सभी रिकॉर्ड की पड़ताल करनी होगी।
यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि राजधानी में करोड़ों की संपत्तियों के दस्तावेज कितने सुरक्षित हैं और प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई कितनी निष्पक्ष होती है।
(

Post a Comment