नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के हालिया बयान ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दे दी। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने नई पीढ़ी को अधिक जिम्मेदारी देने की बात कही और कहा था कि अब वह पहले जितना काम नहीं कर सकते। इसके बाद उनके राजनीति से संन्यास लेने की चर्चाएं शुरू हो गईं।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद गडकरी के कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को राजनीतिक संदर्भ में लिया जाना गलत है। कार्यालय के मुताबिक गडकरी की बात लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के कामकाज और उसके भविष्य के नेतृत्व से संबंधित थी। उनका कहना था कि ट्रस्ट में नई पीढ़ी को अधिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
गडकरी के बयान का राजनीतिक अर्थ इसलिए निकाला गया क्योंकि भाजपा में हाल ही में संगठनात्मक बदलाव हुए हैं और मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर भी चर्चा चल रही है। ऐसे माहौल में उनके ‘नई पीढ़ी को मौका’ वाले बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया।
अब उनके कार्यालय ने साफ कर दिया है कि गडकरी का राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं है और उनके बयान को सार्वजनिक जीवन से विदाई के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यानी फिलहाल गडकरी सक्रिय राजनीति में बने रहने और अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया कि वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक बयानों को संदर्भ से अलग करके पेश करने पर किस तरह राजनीतिक अटकलें तेज हो सकती हैं। गडकरी के मामले में भी आखिरकार उनके कार्यालय को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।

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