लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। तावड़े के उत्तर प्रदेश पहुंचने से पहले ही उनके सामने रखे जाने वाले सवालों और संगठन की मौजूदा स्थिति को लेकर तैयारियों की चर्चा शुरू हो गई है।
पार्टी की प्रश्नावली में जेन-जी यानी नई युवा पीढ़ी से जुड़ी चुनौतियों और चुनावी राजनीति में युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं को अहम मुद्दा माना गया है। सोशल मीडिया, रोजगार, शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे विषयों पर युवाओं के बीच भाजपा की स्वीकार्यता को लेकर संगठन स्तर पर समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।
इसके साथ ही भितरघात भी भाजपा के लिए बड़ी चिंता के रूप में सामने आया है। चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर असंतोष, स्थानीय स्तर पर गुटबाजी और उम्मीदवारों के खिलाफ अंदरूनी विरोध का असर संगठन की चुनावी संभावनाओं पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों की पहचान कर उन्हें दूर करना तावड़े की संगठनात्मक कवायद का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय स्तर से संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन और कमजोर कड़ियों की पहचान पर जोर दिया जा रहा है।
अब देखना होगा कि तावड़े की समीक्षा के बाद भाजपा संगठन में क्या बदलाव होते हैं और जेन-जी की नाराजगी तथा अंदरूनी भितरघात जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी कौन-सी रणनीति अपनाती है।

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