नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के करीब 1,946 करोड़ रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट उन्नयन टेंडर से जुड़े कथित घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं की गईं और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों और शर्तों में बदलाव किया गया। एजेंसी मामले में धन के लेन-देन और कथित रिश्वत की रकम के इस्तेमाल की भी जांच कर रही है।
सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामलों में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित भ्रष्टाचार में उनकी भूमिका की जांच जरूरी है। हालांकि, आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत ने दोष साबित नहीं किया है।
कोर्ट के आदेश के बाद सभी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब मामले में अगली सुनवाई तय तारीख पर होगी, जहां जांच की प्रगति और आरोपियों से जुड़ी कानूनी दलीलों पर सुनवाई हो सकती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब 1,946 करोड़ रुपये के बड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच हो रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि टेंडर प्रक्रिया में किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ और कथित वित्तीय लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही।

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