भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में आज एक अहम इजाफा होने जा रहा है। आईएनएस निपुण, नौसेना का दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट पोत, 31 अगस्त 2026 को मुंबई के नौसैनिक गोदी क्षेत्र में नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसे गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के भीतर बचाव और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
आईएनएस निपुण को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है। पोत को 30 जुलाई 2026 को नौसेना को सौंपा गया था, जिसके बाद इसके परीक्षण और अन्य तैयारियां पूरी की गईं। इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
इस पोत की सबसे बड़ी खासियत इसकी गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव क्षमता है। इसमें आधुनिक गोताखोरी उपकरण, गहरे समुद्र में लंबे समय तक गोताखोरी की सुविधा और दूर से संचालित होने वाले वाहन लगाए गए हैं। ये उपकरण पानी के भीतर निगरानी, खोज और बचाव तथा मलबा हटाने जैसे अभियानों में मदद करेंगे।
आईएनएस निपुण जरूरत पड़ने पर डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल के लिए मदर शिप की भूमिका भी निभाएगा। यानी किसी पनडुब्बी के समुद्र में फंसने की स्थिति में वहां मौजूद नौसैनिकों को बाहर निकालने के अभियान में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नौसेना के लिए इसका महत्व इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इससे भारत की गहरे समुद्र में अभियान, पानी के भीतर हस्तक्षेप और पनडुब्बी बचाव क्षमता और मजबूत होगी। यह स्वदेशी रक्षा निर्माण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

Post a Comment