आलोक कुमार बोले- हिंदू मंदिरों का प्रबंधन श्रद्धालुओं और समाज के हाथों में होना चाहिए
नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सरकारी नियंत्रण वाले हिंदू मंदिरों को मुक्त कराने के लिए वर्ष 2026 में राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि संगठन की मांग है कि मंदिरों का संचालन श्रद्धालुओं और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाए
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आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के तहत देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, सांसदों और विधायकों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके साथ ही प्रमुख शहरों में जनसभाएं आयोजित कर जनसमर्थन जुटाने की योजना भी बनाई गई है।
मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग
विहिप अध्यक्ष ने कहा कि मंदिरों का संचालन आधुनिक और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने मंदिर प्रशासन में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं के दान और मंदिरों की संपत्ति का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
अयोध्या दान मामले पर बोले आलोक कुमार
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग के मामले पर आलोक कुमार ने कहा कि मंदिर न्यास ने स्वयं मामले का संज्ञान लिया, प्राथमिकी दर्ज कराई और विशेष जांच दल से जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
भगवा वस्त्र पहनकर प्रदर्शन पर जताई आपत्ति
आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या मामले में किसी साधु-संत का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा भगवा वस्त्र पहनकर विरोध प्रदर्शन करने से सनातन धर्म की छवि प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि समाज इस तरह की गतिविधियों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगा।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल
विहिप अध्यक्ष ने हाल में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर वामपंथी संगठनों पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कृत्रिम मेधा आधारित कैमरों की फुटेज के आधार पर पुलिस को कुछ संदिग्ध लोगों की जानकारी मिली है।
बौद्धिक प्रतिकार विश्लेषण:
मंदिरों के सरकारी नियंत्रण का मुद्दा लंबे समय से धार्मिक संगठनों और सरकारों के बीच बहस का विषय रहा है। अब विहिप के राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ सकता है।

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