शराब उद्योग पर एफएसएसएआई का बड़ा प्रहार! ओल्ड मॉन्क, मैकडॉवेल्स, बैगपाइपर, रॉयल चैलेंज समेत कई ब्रांडों की वैरायटी पर रोक

 

नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शराब उद्योग में भ्रामक दावों और कृत्रिम फ्लेवर के इस्तेमाल पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई लोकप्रिय ब्रांडों की कुछ वैरायटी के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है। जांच में पाया गया कि कुछ उत्पादों में लेबल पर किए गए दावों और वास्तविक उत्पाद के बीच अंतर था तथा कुछ मामलों में कृत्रिम फ्लेवर के उपयोग को लेकर नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले।



एफएसएसएआई के अनुसार, कुछ निर्माता एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) से शराब तैयार कर उसमें बाद में रम या व्हिस्की जैसा स्वाद देने के लिए फ्लेवर मिला रहे थे। नियामक का कहना है कि यदि किसी उत्पाद को रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसका स्वाद और विशेषताएं निर्धारित विनिर्माण प्रक्रिया से आनी चाहिए, न कि बाद में मिलाए गए कृत्रिम फ्लेवर से।


जांच के दौरान ओल्ड मॉन्क के एक वैरिएंट पर उम्र (एजिंग) से जुड़े दावे को भी भ्रामक पाया गया। इसके अलावा मैकडॉवेल्स नंबर-1 रम, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स रम, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज की कुछ वैरायटी भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं।


कार्रवाई का असर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कई विनिर्माण इकाइयों पर पड़ा है। नियामक ने संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी कर नियमों के अनुरूप उत्पादन और लेबलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कुछ मामलों में कंपनियों को सीमित राहत भी दी गई है, ताकि पहले से तैयार स्टॉक के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।


यह कार्रवाई पूरे शराब उद्योग पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि केवल उन उत्पादों और वैरायटी पर केंद्रित है, जिनमें जांच के दौरान लेबलिंग, फ्लेवरिंग या दावों से जुड़े संभावित उल्लंघन सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को लेकर निगरानी और सख्त हो सकती है।


हाल के महीनों में एफएसएसएआई ने खाद्य एवं पेय उत्पादों पर भ्रामक दावों के खिलाफ लगातार सख्ती बढ़ाई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य उत्पाद श्रेणियों में भी इसी तरह की व्यापक जांच और कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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