नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक 6 अगस्त को पहली बार बड़े स्तर पर जेनरेशन Z और जेनरेशन अल्फा के विद्यार्थियों से सीधे संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम केवल एक सामान्य संबोधन नहीं, बल्कि तेजी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल में नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने की संघ की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की सोच, सूचना के स्रोत और राजनीतिक भागीदारी का स्वरूप तेजी से बदला है। सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर सक्रिय नई पीढ़ी पारंपरिक संगठनों से अलग तरीके से संवाद करती है। ऐसे में संघ के लिए भी अपनी कार्यशैली और संवाद के तौर-तरीकों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी रोजगार, तकनीक, नवाचार, उद्यमिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक अवसरों जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोहन भागवत का संवाद केवल वैचारिक संदेश तक सीमित रहता है या युवाओं की वास्तविक आकांक्षाओं और समकालीन चुनौतियों पर भी स्पष्ट दृष्टिकोण सामने आता है।
संघ लंबे समय से विद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्र संगठनों के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास करता रहा है, लेकिन डिजिटल युग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती सामाजिक सोच ने इस चुनौती को और कठिन बना दिया है। यही कारण है कि 6 अगस्त का यह संवाद संघ के लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के बीच अपनी स्वीकार्यता और प्रभाव को परखने की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संवाद नई पीढ़ी के साथ स्थायी जुड़ाव की शुरुआत बनेगा, या फिर इसे केवल एक प्रतीकात्मक पहल के रूप में देखा जाएगा। इसका जवाब कार्यक्रम के संदेश और युवाओं की प्रतिक्रिया तय करेगी।

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