अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा कथित चोरी प्रकरण अब जांच से आगे बढ़कर मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और संवेदनशील सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। पूर्व महासचिव चंपत राय की कथित गोपनीय डायरी में दर्ज घटनाक्रम सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि मंदिर परिसर में हुई घटना की जानकारी समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक आखिर कैसे पहुंची। रिपोर्टों के मुताबिक, डायरी में इस बात को लेकर ‘भेदिए’ की तलाश का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति को इसका जिम्मेदार ठहराने का कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
डायरी में एसआईटी की पूछताछ से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख बताया गया है। गोपाल राव से पूछताछ के दौरान शुरुआत में आनाकानी और बाद में जांच टीम के सख्त रुख के बाद जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। खुद डायरी के विवरण में यह भी स्पष्ट किया गया कि गोपाल राव ने जांच टीम को क्या बताया, इसकी जानकारी चंपत राय को नहीं थी। इसलिए इन दावों को जांच के दस्तावेजी निष्कर्ष के बजाय डायरी में दर्ज सूचना के रूप में देखना जरूरी है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू जांच की अलग-अलग अवस्थाओं को लेकर है। प्रारंभिक जांच में मंदिर परिसर से नकदी चोरी की पुष्टि और करीब 80 लाख रुपये की रकम के बिना पुलिस को सूचना दिए बरामद होने जैसी बातें सामने आई थीं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कर्मचारियों की गतिविधियों और सुरक्षा प्रक्रिया में कथित खामियों पर भी सवाल उठे थे।
वहीं, बाद में सामने आई अंतिम एसआईटी रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त किए जाने की खबर है। यानी शुरुआती जांच में उठे सवाल और अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्ष के बीच अंतर ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि मंदिर की इतनी संवेदनशील जानकारी बाहर कैसे पहुंची, सुरक्षा और नकदी प्रबंधन में खामियां क्यों सामने आईं और प्रारंभिक जांच में उठे सवालों का अंतिम जवाब क्या है? ‘भेदिया’ कौन था, यह आरोप नहीं बल्कि जांच का विषय है—और इसका जवाब प्रमाण के साथ ही सामने आना चाहिए।

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