चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच दिया इस्तीफा, ट्रस्ट ने स्वीकार भी किया; अब सवाल—पद से हटने के बाद मंदिर व्यवस्था में उनकी भूमिका कितनी?
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं की जांच ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने जून में अपने इस्तीफे सौंपे थे। बाद में ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफे स्वीकार किए गए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म होती दिखाई नहीं दे रही। हालिया रिपोर्टों के अनुसार चढ़ावा विवाद के बीच कुछ समय तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहने के बाद चंपत राय फिर अयोध्या में सक्रिय नजर आए। उन्होंने महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात भी की। इससे सवाल उठ रहा है कि पद छोड़ने के बाद भी मंदिर से जुड़े मामलों में उनकी वास्तविक भूमिका क्या है?
जांच के बीच इस्तीफा, लेकिन सवाल कायम
अयोध्या पुलिस की जांच में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ा और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर भी राजनीतिक एवं सार्वजनिक सवाल उठे। चंपत राय ने पुलिस के सामने अपने बयान में कथित हेराफेरी में अपनी भूमिका से इनकार किया है।
यानी एक तरफ जिम्मेदारी के पद से इस्तीफा, दूसरी तरफ आरोपों में व्यक्तिगत भूमिका से इनकार—अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था की निगरानी, गिनती और लेखे-जोखे की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी?
एसआईटी की जांच और जवाबदेही का सवाल
चढ़ावा चोरी प्रकरण में विशेष जांच दल की कार्रवाई के बाद कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और जांच आगे बढ़ी। हालिया रिपोर्ट के अनुसार विशेष जांच दल अलग समानांतर जांच करने के बजाय चल रही जांच के साथ समन्वय कर रहा है। मंदिर की दान-गणना व्यवस्था की सुरक्षा को भी मजबूत करने की तैयारी है।
अब बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि किसने चढ़ावा चुराया?
सवाल यह भी है—
चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था में चूक कैसे हुई?
किस स्तर पर हिसाब-किताब की जिम्मेदारी तय थी?
जिन पदाधिकारियों के कार्यकाल में कथित अनियमितताएं सामने आईं, उनकी प्रशासनिक जवाबदेही कैसे तय होगी?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या इस्तीफा देना जवाबदेही का अंत है या जांच के दौरान जिम्मेदारी और भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए?
मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की परीक्षा
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाला चढ़ावा सिर्फ धन नहीं, बल्कि भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है। इसलिए चढ़ावे से जुड़ी किसी भी कथित गड़बड़ी की जांच केवल आरोपियों तक सीमित न रहकर पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तक पहुंचनी चाहिए।
पद बदल सकता है, लेकिन सवाल नहीं।
चंपत राय की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकलेगा। लेकिन इस्तीफे के बाद भी उनकी अयोध्या में सक्रियता ने एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—
पद से दूरी बनी या सिर्फ पदनाम बदला?
अब निगाहें जांच पर हैं। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि मंदिर के चढ़ावे के एक-एक रुपये का हिसाब सामने आएगा और जिम्मेदारी जहां भी तय होगी, वहां कार्रवाई होगी।

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