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दतिया में कांग्रेस बरकरार, मांजलपुर में भाजपा ने बचाई प्रतिष्ठा, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की नई सियासत को पहली बड़ी जीत
प्रणव बजाज| बौद्धिक प्रतिकार
तीन राज्यों के उपचुनावों ने केवल तीन सीटों का फैसला नहीं किया, बल्कि तीन अलग-अलग राजनीतिक संदेश दिए। मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर अपनी पकड़ मजबूत रखी। गुजरात के मांजलपुर में भाजपा ने सीट बचाकर राहत की सांस ली, जबकि बिहार के बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जन सुराज ने पहली बार बड़ी चुनावी सफलता हासिल कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी।
दतिया: भाजपा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका
दतिया में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट बदलकर नया प्रयोग किया, लेकिन यह दांव सफल नहीं हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। स्थानीय समीकरण, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और कांग्रेस की एकजुट रणनीति ने भाजपा की राह कठिन कर दी।
दतिया से निकले पांच संदेश
टिकट बदलने का प्रयोग सफल नहीं हुआ।
संगठन में अंदरूनी असंतोष चुनाव पर भारी पड़ा।
कांग्रेस ने स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा कायम रखा।
बूथ प्रबंधन में भाजपा अपेक्षित बढ़त नहीं बना सकी।
2028 विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष का मनोबल बढ़ा।
मांजलपुर: भाजपा ने बचाई प्रतिष्ठा
गुजरात की मांजलपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। यहां पार्टी ने अपना संगठन और परंपरागत वोट बैंक संभालते हुए सीट बरकरार रखी। इससे स्पष्ट हुआ कि गुजरात में भाजपा की संगठनात्मक पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।
बांकीपुर: प्रशांत किशोर की राजनीति को पहला बड़ा पुरस्कार
बिहार की बांकीपुर सीट पर जन सुराज की जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा। वर्षों तक चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अब सीधे चुनावी राजनीति में उतरकर पहली बड़ी सफलता हासिल करने में सफल रहे। यह परिणाम 2026 और 2030 के बिहार चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
*प्रशांत किशोर का भाजपा पर हमला
बांकीपुर में पहले राउंड से बढ़त बनाए हुए जन सुराज पार्टी के संस्थापक औ प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यहां भाजपा का 30 बरस का गढ़ 30 दिनों में ढह गया। यह चुनाव विधायक चुनने के लिए नहीं था। मेरी सम्राट चौधरी से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, लेकिन इस चुनाव के माध्यम से बिहार की जनता ने भाजपा को यह संदेश दिया है कि किसी अच्छे चरित्रवान और काबिल इंसान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाइए। जितनी चिंता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात के लिए करते हैं, तो थोड़ी चिंता बिहार की भी करें ताकि यहां का पलायन रुके और बेरोजगारी कम हो। जिन्होंने हमें वोट दिया, उनका धन्यवाद। जिन्होंने वोट नहीं दिया, उनसे यही कहना चाहते हैं कि आपका विश्वास जीतने के लिए और मेहनत और प्रयास करेंगे। मेरे विधायक बनने से बांकीपुर बंगलूरू नहीं बनेगा, लेकिन आपको दो-तीन महीने में फर्क जरूर दिखेगा।

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