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पेंशन फाइल अटकाई तो अफसर पर गिरेगी गाज, अब हर टेबल की जवाबदेही तय

सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन रोकना पड़ेगा भारी, 15 कार्य दिवस में निपटाना होगा नया प्रकरण



भोपाल, 31 अगस्त। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन फाइल अब किसी अधिकारी-कर्मचारी की टेबल पर महीनों धूल नहीं फांकेगी। वित्त विभाग ने राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल के तहत ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निपटारे के लिए क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर—हर स्तर की समय-सीमा तय कर दी है। तय समय में फाइल आगे नहीं बढ़ी तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होगी।


नए पेंशन प्रकरण को अधिकतम 15 कार्य दिवस में पूरा करना होगा। क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर—तीनों के लिए पांच-पांच कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। वहीं पुनरीक्षित पेंशन के प्रकरण 10 कार्य दिवस और वेतन निर्धारण से जुड़े मामले 11 कार्य दिवस में निपटाने होंगे।


वित्त विभाग की समीक्षा में संभागीय और जिला कार्यालयों में पेंशन प्रकरण लंबे समय तक लंबित पाए गए थे। इसके बाद व्यवस्था को सख्त किया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में देरी न हो, इसके लिए अग्रिम पेंशन प्रकरण भी समय पर तैयार करना जरूरी होगा।


राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल का गठन वित्त विभाग ने जून 2025 में किया था। 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण की व्यवस्था इसी केंद्रीकृत प्रणाली के जरिए संचालित है।


अब व्यवस्था का संदेश साफ है—पेंशन किसी अधिकारी की मेहरबानी नहीं, कर्मचारी का अधिकार है। फाइल रोकने वाले की टेबल भी अब जवाबदेही से मुक्त नहीं रहेगी।

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