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ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के मामलों में सतीश सनपाल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

छह आपराधिक मामले रद्द कराने की मांग खारिज; कोर्ट ने कहा—विदेश में मौजूदगी से आपराधिक जिम्मेदारी खत्म नहीं होती


जबलपुर। ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे और अवैध बेटिंग से जुड़े मामलों में आरोपी बताए गए सट्‌टा किंग सतीश सनपाल को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज छह आपराधिक मामलों को निरस्त करने की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किए जाने वाले कथित अपराध में आरोपी घटना के समय संबंधित स्थान या देश में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं था, तो केवल इस आधार पर उसे आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।

14 मार्च 2020 से दुबई में रहने का दावा

सनपाल की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह 14 मार्च 2020 से दुबई में रह रहा है और उसके बाद भारत नहीं आया। उसका दावा था कि उसकी गैरमौजूदगी में उसे बदनाम करने की नीयत से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे से जुड़े मामले दर्ज किए गए।


उसकी ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना पक्ष रखने की अनुमति भी मांगी गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने छह मामलों को रद्द करने की उसकी मांग स्वीकार नहीं की।


सह-आरोपियों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर ट्रायल में होगी जांच


मामले में सह-आरोपियों के बयान, गवाहों के मुकरने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे भी उठाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि इन सभी तथ्यों की विस्तृत जांच ट्रायल कोर्ट में होगी।


अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 528 के तहत हाईकोर्ट मिनी-ट्रायल की तरह साक्ष्यों की विश्वसनीयता का विस्तृत मूल्यांकन नहीं कर सकता। यानी इस स्तर पर अदालत यह तय करने के लिए साक्ष्यों की गहराई में नहीं जाएगी कि आरोप अंततः साबित होंगे या नहीं।


राज्य ने किया याचिकाओं का विरोध


राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने याचिकाओं का विरोध किया। राज्य का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।


फैसले के बाद सनपाल के खिलाफ दर्ज छह मामलों में आगे की आपराधिक न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।


विदेश में बैठकर अपराध का आरोप—अब ट्रायल में खुलेगा पूरा नेटवर्क


इस आदेश का महत्वपूर्ण पहलू ऑनलाइन अपराधों की प्रकृति से जुड़ा है। इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संचालित गतिविधियों में आरोपी का किसी दूसरे देश में होना अपने आप में निर्णायक बचाव नहीं बन सकता। अब ट्रायल कोर्ट में यह देखा जाएगा कि कथित सट्टा नेटवर्क कैसे संचालित हुआ, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कितने विश्वसनीय हैं और आरोपों से सनपाल का संबंध किस स्तर तक स्थापित होता है।


हाईकोर्ट का फैसला आरोप साबित होने की घोषणा नहीं है। अदालत ने केवल छह मामलों को इस स्तर पर समाप्त करने से इनकार किया है। अब आरोपों की वास्तविकता और साक्ष्यों की वैधता का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में होगा।

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