भावनगर में मौतों के बाद मध्यप्रदेश कनेक्शन की जांच तेज, रईस तक पहुंची गुजरात पुलिस; सवाल—बोतल उज्जैन से आई तो जहर कहां मिला?
प्रणव बजाज
भावनगर शराबकांड में उज्जैन का नाम सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उज्जैन की भूमिका क्या है? क्या यहां से केवल शराब की बोतलों की आपूर्ति हुई थी या जहरीली शराब तैयार करने में भी मध्यप्रदेश की कोई भूमिका थी? इन सवालों का जवाब अभी जांच में सामने आना बाकी है।
गुजरात के भावनगर में नकली शराब पीने से कई लोगों की मौत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच की एक कड़ी मध्यप्रदेश के उज्जैन तक पहुंची और रईस नाम के व्यक्ति को लेकर गुजरात पुलिस की कार्रवाई सामने आई। रिपोर्टों में उज्जैन से बोतलों की आपूर्ति होने की बात कही गई है।
लेकिन यहीं जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है—
बोतल उज्जैन से आई तो उसके अंदर जहरीला पदार्थ कहां डाला गया?
यदि मिलावट गुजरात में हुई तो उज्जैन को जहरीली शराब का निर्माण केंद्र बताने का आधार क्या है? और यदि मिलावट मध्यप्रदेश में हुई तो उसके ठिकाने, आरोपी, रसायन और पूरी आपूर्ति श्रृंखला अब तक सामने क्यों नहीं आई?
सिर्फ बोतल से पूरा नेटवर्क साबित नहीं होता
किसी शराब की बोतल का किसी शहर से दूसरे शहर पहुंचना अपने आप यह साबित नहीं करता कि जहरीली शराब भी उसी शहर में बनाई गई थी। इसीलिए जांच में बोतलों के साथ-साथ उनके परिवहन, खरीद, भुगतान, मोबाइल संपर्क और रासायनिक नमूनों की जांच जरूरी है।
सबसे अहम प्रमाण एफएसएल रिपोर्ट होगी। उसमें पता चलेगा कि शराब में कौन-सा जहरीला रसायन मिला था और उसकी मात्रा कितनी थी।
अब जांच उज्जैन से आगे बढ़नी चाहिए
यदि रईस इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है तो उसकी पूरी भूमिका सामने आनी चाहिए। उसके संपर्क में कौन था? माल किसने दिया? किस वाहन से भेजा गया? गुजरात में किसने लिया? और मिलावट किस स्थान पर हुई?
यही वे सवाल हैं जिनके जवाब पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकते हैं।
उज्जैन को बदनाम करना आसान, सच साबित करना मुश्किल
उज्जैन का नाम सामने आते ही पूरे शहर को शराबकांड से जोड़ देना आसान है, लेकिन जांच का पैमाना शहर नहीं, सबूत होना चाहिए।
अगर उज्जैन से अवैध शराब की आपूर्ति हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन अगर उज्जैन केवल आपूर्ति श्रृंखला की एक कड़ी है और जहरीली मिलावट कहीं और हुई है तो यह तथ्य भी सार्वजनिक होना चाहिए।
सवाल उज्जैन को बचाने का नहीं है। सवाल यह है कि असली दोषी कौन है।
शराब कहां से आई?
किसने भेजी?
किसने मंगाई?
जहर किसने मिलाया?
और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन है?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक उज्जैन का नाम जांच का विषय है, दोष का प्रमाण नहीं।
अब जरूरत बयानबाजी की नहीं, पूरी सप्लाई चेन खोलने की है।

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