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राखी बांधने से पहले जान लें ये परंपराएं, दिशा से लेकर तिलक तक का रखें ध्यान

 


नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है। इस दिन बहनें भाई की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हुए उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं। धार्मिक परंपराओं में राखी बांधने की विधि से जुड़ी कुछ मान्यताएं भी बताई गई हैं। हालांकि इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



मान्यता के अनुसार राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। बहन सामने बैठकर पहले भाई को तिलक लगाती है और फिर राखी बांधती है। कई परिवारों में तिलक के लिए रोली या कुमकुम के साथ अक्षत का इस्तेमाल करने की परंपरा है।


राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जाती है। इसमें राखी, रोली-कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है। भाई की आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है।


धार्मिक मान्यताओं में राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाने और भाई द्वारा बहन को उपहार देने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उपहार केवल वस्तु नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।


एक और बात का ध्यान रखना चाहिए कि राखी बहुत कसकर न बांधी जाए। लंबे समय तक कलाई पर रहने वाली राखी से त्वचा पर जलन या दबाव हो सकता है। बच्चों के लिए राखी चुनते समय छोटे या नुकीले सजावटी हिस्सों से बचना बेहतर है।


रक्षाबंधन की रस्मों के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग तरीके हो सकते हैं। इसलिए दिशा या विधि को लेकर किसी एक परंपरा को अनिवार्य नियम मानने के बजाय अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा का सम्मान करना ही बेहतर है।

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