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सीबीआई जांच में ‘अनसूटेबल’ मिले नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को राहत

हाईकोर्ट का आदेश—सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित छात्र परीक्षा में हो सकेंगे शामिल, परिणाम भी जारी होगा


ग्वालियर। मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के बीच हाईकोर्ट ने हजारों छात्रों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सीबीआई जांच में ‘अनसूटेबल’ पाए गए नर्सिंग कॉलेजों से ‘सूटेबल’ कॉलेजों में स्थानांतरित किए गए छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल करने और उनके परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं।


जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।


फर्जी कॉलेजों की मान्यता को लेकर दायर हुई थी याचिका


मामला प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया से जुड़ा है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कई नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देते समय निर्धारित नियमों और आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ कॉलेज केवल कागजों पर संचालित हो रहे थे, फिर भी उन्हें मान्यता दे दी गई।


मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में परीक्षा आयोजित करने और परीक्षा परिणाम जारी करने पर रोक लगाते हुए सीबीआई को जांच के निर्देश दिए थे।


695 कॉलेजों की जांच, 156 पाए गए सूटेबल


सीबीआई जांच में प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों का परीक्षण किया गया। इनमें प्रारंभिक जांच के दौरान केवल 156 कॉलेजों को ‘सूटेबल’ पाया गया, जबकि बड़ी संख्या में कॉलेज निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतरे।


हाईकोर्ट ने ‘अनसूटेबल’ कॉलेजों के छात्रों के भविष्य को देखते हुए उन्हें ‘सूटेबल’ कॉलेजों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीबीआई जांच में सामने आई कमियों को दूर करने वाले 89 कॉलेजों को भी बाद में ‘सूटेबल’ श्रेणी में शामिल किया गया।


छात्रों की गलती की सजा क्यों?


पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उन छात्रों के भविष्य का था, जिन्होंने कॉलेज में प्रवेश लेते समय संस्थान की मान्यता और व्यवस्था पर भरोसा किया था। कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया में यदि नियमों की अनदेखी हुई तो उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़े, यह स्थिति खुद कई सवाल खड़े करती है।


हाईकोर्ट के ताजा आदेश से ऐसे छात्रों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब वे आगामी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे और उनके परिणाम भी जारी किए जा सकेंगे।


हालांकि, नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता में कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी किसकी थी, किन अधिकारियों ने नियमों को नजरअंदाज किया और कागजों पर चल रहे कॉलेजों को मान्यता कैसे मिली—इन सवालों का जवाब अभी बाकी है। अगली सुनवाई में मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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