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मध्य प्रदेश में हर दिन 130 महिलाएं-लड़कियां लापता, हाई कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

जनहित याचिका पर अदालत सख्त, लापता लोगों के आंकड़े सार्वजनिक करने और कार्रवाई की मांग; सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल



भोपाल। मध्य प्रदेश में महिलाओं और लड़कियों के लगातार लापता होने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य शासन, केंद्र शासन सहित संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 28 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश में 2,74,311 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं। यानी औसतन करीब 130 महिलाएं और लड़कियां प्रतिदिन गुमशुदा दर्ज की गईं। इनमें बड़ी संख्या को तलाश लिया गया, लेकिन हजारों महिलाएं और लड़कियां अब भी लापता बताई गई हैं।


आंकड़े छिपाने का आरोप


याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन विभागों और अधिकारियों पर लापता महिलाओं तथा बच्चों की तलाश और सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं ले रहे। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि लापता लोगों से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।


अदालत के संज्ञान में यह मामला ऐसे समय आया है जब पहले भी मध्य प्रदेश में लापता नाबालिग लड़कियों की तलाश को लेकर हाई कोर्ट पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका है। जनवरी 2026 में हाई कोर्ट ने ग्वालियर और शिवपुरी में लंबे समय से लापता नाबालिग लड़कियों के मामलों में पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा था।


68 हजार से अधिक महिलाएं-लड़कियां अब भी लापता


विधानसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2,74,311 गुमशुदगी मामलों में से 2,35,977 महिलाओं और लड़कियों को ट्रेस किया गया, जबकि 68,334 अब भी लापता बताई गईं। आंकड़ों का यह अंतर बताता है कि समस्या केवल गुमशुदगी दर्ज होने तक सीमित नहीं है, बल्कि लापता लोगों को सुरक्षित वापस लाना भी बड़ी चुनौती है।


अब जवाबदेही तय होगी?


हाई कोर्ट की सुनवाई ने सरकार और पुलिस के सामने सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां लापता हो रही हैं तो उनकी तलाश के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है?


क्या प्रत्येक गुमशुदगी की गंभीरता से जांच होती है? कितने मामलों में मानव तस्करी, अपराध या अन्य आपराधिक कोण की जांच हुई? कितने मामलों में पुलिस की लापरवाही सामने आई और कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?


अब हाई कोर्ट के नोटिस के बाद सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा। मामला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि लापता नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें तलाशने की राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी का है।

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