नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय निर्यात को जुलाई में बड़ी मजबूती मिली है। जुलाई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 19.63 प्रतिशत बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। निर्यात वृद्धि जून 2022 के बाद सबसे तेज रही।
इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद और समुद्री उत्पादों की मांग ने इस बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जुलाई में अमेरिका, चीन, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया और मलेशिया जैसे बाजारों में भारतीय माल की खेप बढ़ी। पश्चिम एशिया को भी निर्यात में 8.62 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
चीन को निर्यात में भी तेज उछाल
चीन के साथ भारत का व्यापार लंबे समय से भारी असंतुलन वाला रहा है, लेकिन भारतीय निर्यात में अब तेजी दिखाई दे रही है। 2026 की पहली छमाही में चीन को भारत का निर्यात 37.2 प्रतिशत बढ़कर 12.31 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि इसी अवधि में चीन से भारत का आयात 79.41 अरब डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा अब भी बहुत बड़ा है।
यानी चीन को निर्यात बढ़ना सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन इसे व्यापार संतुलन में निर्णायक बदलाव मानना अभी जल्दबाजी होगी।
अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार
अमेरिका भारतीय वस्तुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजार बना हुआ है। जुलाई में अमेरिका समेत कई प्रमुख बाजारों में भारतीय सामान की मांग बढ़ी। इससे भारतीय निर्यातकों को ऐसे समय राहत मिली है, जब वैश्विक स्तर पर शुल्क, युद्ध और परिवहन लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
लेकिन व्यापार घाटे की चुनौती बरकरार
निर्यात का रिकॉर्ड उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। जुलाई में भारत का वस्तु आयात 17.52 प्रतिशत बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके कारण वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, जो छह महीने का सबसे ऊंचा स्तर है।
कच्चे तेल का आयात बिल करीब 18.31 अरब डॉलर रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात में भी बढ़ोतरी ने कुल आयात को ऊपर रखा। इसलिए केवल निर्यात बढ़ने से व्यापार घाटा घटने की उम्मीद अभी आंकड़ों से पुष्ट नहीं होती।
चार महीने में निर्यात 316 अरब डॉलर के पार
अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भारत का वस्तु और सेवा निर्यात अनुमानित रूप से 316.42 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 13.16 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में वस्तु निर्यात 17.04 प्रतिशत बढ़कर 173.78 अरब डॉलर पहुंच गया।
असली परीक्षा आगे
जुलाई के आंकड़े भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए निश्चित रूप से मजबूत संकेत हैं। लेकिन चुनौती यह है कि निर्यात की इस रफ्तार को लगातार बनाए रखा जाए और साथ ही कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अन्य भारी आयातों पर निर्भरता कम हो। निर्यात का रिकॉर्ड बना है, लेकिन व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड चिंता का संकेत दे रहा है। भारत के लिए अगला लक्ष्य केवल ज्यादा माल बेचना नहीं, बल्कि ज्यादा मूल्यवर्धित और स्वदेशी उत्पादों के जरिए विदेशी मुद्रा की वास्तविक कमाई बढ़ाना होना चाहिए।

Post a Comment